हमें अपने जीवन से जुड़े अहम फैसले खुद लेने चाहिए,ताकी बाद में हमें उसका अफ़सोस ना हो।
दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
जिंदगी का खेल भी कुछ कबड्डी के खेल जैसा ही है ,सफलता की लाइन टच करते ही लोग आपके पैर खींचने लग जाते हैं ...
यक़ीनन सूरज चढ़ेगाइस रात का रंग उतरेगा
कभी कभी ऐसा क्यों लगता है तू मेरा होकर भी जुदा सा क्यों लगता है ?माना तेरी भी कुछ मजबूरिया है पर ये तों बता ये जो तेरी हर आहट का इंतजार करता है ये शक्श आखिर तेरा क्या लगता...