तू रूह में शामिल है मेरी आती जाती साँसों की तरहजिस पल भूलूँगी तुझेवो लम्हा मेरा आखिरी होगा

कि मरने के बाद भी मेरी आंख खुली रही,आदत जो पड गई थीं तेरे इंतज़ार की...

हर आदमी बेईमानी की तलाश में है,और हर आदमी चिल्लाता है,बड़ी बेईमानी है।

निर्दोष को मारोगे तो मिट्टी भी नसीब नहीं होगी

आवाज तक नहीं हुईऔर सब कुछ टूटकर बिखर गया....!!

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