अकेला इंसान और वीरान मकान एक सा होता है जहां वह स्वयं के प्रश्नों का स्वयं ही उत्तर होता है राजेश गौरी

तानों की भट्ठी में तपा आदमी, राख नहीं सोना बनता है....

उन अक्लमंदो से दूरी अच्छी है, जो हमें बेवकूफ समझते हैं...

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