कर्ता करे न कर सकै , शिव करै सो होय , तीन लौक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा ना कोय

सच में अक्सर ऐसा होता जब भी मेरे मन और संघर्ष के बीच युद्ध होता है सोचते अब लड़ के खड़ा हुए की फिर लड़खड़ा के गिर ही जाते हैं शायद यही असल ज़िंदगी का यथार्थ मतलब है। नेहा यादव

अगर तुम बिन GOAL के सुबह उठ रहे हो, तो दोस्त तुम फिर वापस सो जाओ..!!

इल्म किसी भी यूनिवर्सिटी से हासिल करलो, पर तजुर्बा वक्त की ठोकरों से ही हांसिल होगा। 『 𝐙𝐞𝐡𝐚𝐫𝐥𝐢𝐧𝐞 』

सांस तो लेने दिया करो... आंख खुलते ही याद आ जाते हो..!!

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