याद रखना, ढलते वक्त में हाथ छोड़ा है, हिसाब तो जरूर किया जाएगा ।

चुप हैं किसी सब्र से तो पत्थर न समझ हमें, दिल पे असर हुआ है तेरी बात-बात का...

हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्तबस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह

बगावत हमेशा ईमानदार और स्वाभिमानी लोग ही करते हैं, चालाक लोग तो चापलूसी और तलवे चाट कर अपना काम निकालते रहते हैं।

तेरे मन को न भाया तो क्या करोगे, में याद ही ना आया तो क्या करोगे; ये किस्सा वो नग्मे वो आए हुए खत, में इन कहानी में ना समाया तो क्या करोगे_।।

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