कुछ कश्तियाँ डूबी है, अपने सूराखों की वजह से भी, यूँ हर बार इल्ज़ाम,, तूफानों पर न लगाया करो।। सेजल

जो डरा ही नहीं मुझे खोने से वो क्या अफसोस करेगा?? मेरे ना होने से...

थक चुका हूं इन पुराने अल्फ़ाज़ों से खेलते खेलते, तुम मेरे दिल से खेल कर एक नया शब्दकोश उपहार कर दो..!!

दिल लगा कर ठुकराए हुए लोग हैं हम.. अफ़सोस कीजिए, किनारा कीजिए, सबक लीजिए..!!

मै सुकून लिखूं तुम गंगाघाट समझ लेना, में इश्क़ लिखु तुम चाय समझ लेना।

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