जो चराग़ों को बुझाने की हिमाक़त करते हैं ज़िंदगी-भर उन के हिस्से रौशनी आती नहीं राघवेंद्र द्विवेदी

पैसों से सिर्फ पेट भरता है , दिल आज भी भावनाओं का ही मोहताज है

स्वार्थ की बदबू मारने वाले मतलबी लोग….. मतलब होने पर चंदन सी सुग़न्धित बातें करते है !!!

चढ़ते हैं चढ़ाइयाँ बनाकर सीढ़ियाँ जिन काँधों पर, फतह होते ही मंज़िल लतियाकर गिरा देते हैं लोग.

जिनकी आंखें बात बात पर भीग जाती हैं, वो कमज़ोर नहीं दिल के साफ होते हैं....

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