मेरा बुरा वक्त क्या आ गया आज अंधों को भी मेरे में कमियां दिखने लगी!!

तुम रूठना तो ऐसे रूठना जैसे माॅं रूठती ही माॅं मेरी सुबह की बात शाम तक भूल जाती है... सपना गर्ग

शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है लौट आए हैं सभी, एक परिंदा कम है फ़हीम जोगापुरी

सीधे इंसान को गलती से भी धोखा मत देना, क्योंकि सीधे इंसान का जवाब ऊपर वाला बहुत टेढ़े तरीके से देता है।

मोहब्बत का तरीका सबसे जुदा रखा है.. ज़िक्र हर बात में तेरा, मगर नाम छुपा रखा है..

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