जीत का जुनून है, फिर हार सोचना क्यों!

तेरी मर्जी से ढल जाऊं हर बार ये मुमकिन तो नहीं,,मेरा भी अपना वजूद है मैं कोई आइना तो नहीं...!!

वो महावर से भरे पांव कब खून से भर गए पता भी नहीं चल पाया उसे जो दिल जीतने निकली थी वो कब ख़ुद से हार गई पता भी नहीं चल पाया उसे....!!

घबराया साहेब बात बात पर डरता है,जब डगमग होवे कुर्सी तब धर्म को आगे करता है।पटर पटर बोले है ये सौ में नब्बे झूठ,राम नाम का लगा मुखौटा लेगा सब को लूट।चीन बढ़ाता अपना नक्शा उससे छिपता फिरता है,घबराया साहेब...

दुःख रूप बदलता हैलेकिन खत्म नहीं होता

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