रिश्ते में रहते हुए तो है ही, रिश्ते से अलग होते हुए भी डिग्निटी बहुत ज़रूरी है.

बहुत कम लोग जानते हैं कि वो बहुत कम जानते हैं ! हजारी प्रसाद द्विवेदी

तू नहीं तो कोई और सही, कोई और नहीं तो कोई और सही, बहुत लंबी हैं जमीं, मिलेंगे लाख हंसी, इस जमाने मे सनम तू अकेली तो नहीं.

पिता का मौन यदि सुन सको तो, दुनिया के ताने सुनने की नौबत नहीं आएगी। प्रह्लाद पाठक

आ गए ना तुम अपनी औकात पर.. मेरा मतलब है मतलब की बात पर..!!

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