कितना हसीन इत्तेफाक़ था तेरी गली में आने का, किसी काम से आये थे… किसी काम के ना रहे।

एक दौर के बाद सब कुछ बदल जाता हैं वक्त, हालात, लोग और शायद हम भी..!!

इलज़ाम आखिर हमारे सर ही आया , हम चुप रहकर भी बदनाम हो गए ..!!

रोक कर बैठे है ज़िंदगी को तुम आओ तो जिना शुरू करेंगे..

क्या कहें किस कदर किसे खोने से डरते हैं, यही बात है,के अब किसी के होने से डरते हैं...!!

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