बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है सफ़र जारी रखो वक्त बदलने वाला है!

मुकम्मल हो गर इश्क़ तो तेरे सारे नखरें झेलूं मैं, तुझे लेकर अपनी आगोश में तेरी जुल्फों से खेलूं मैं..!! विरक्ति

हम बने ही थे तबाह होने के लिए तेरा मिलना तो बस एक बहाना था

कभी इसका दिल रखा और कभी उसका दिल रखा इसी कशमकश में भूल गए खुद का दिल कहाँ रखा

मंज़िल को अगर पाने की होड़ है तो फिर क्या फर्क पड़ता कि राहों मे कितनी मोड़ है

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