ये तेरा हक़ है कि तुझे गौर से देखा जाए , कि क़भी मिलो मुझे ये फर्ज़ अदा करना है ।।

गणित में कमज़ोर है वो वरना दो पलो के लिए बारह घण्टो की रात कौन ज़ाया करता है...

आँसुओं से शिकायत यूँ कर के भी क्या दर्द चेहरे से भी तो छलक जाता है अम्बष्ठ

तपिश भूख की जानवरों कि भी इंसानों जितनी है, देखना ये है पेट भरने लायक तुममें इंसानियत कितनी है..!! विरक्ति

वो आइने में कैसे बर्दास्त करती होगी खुद को, उसे तो धोखेबाज लोगो से सख्त नफरत थी..

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