आँसुओं से शिकायत यूँ कर के भी क्या दर्द चेहरे से भी तो छलक जाता है अम्बष्ठ

तपिश भूख की जानवरों कि भी इंसानों जितनी है, देखना ये है पेट भरने लायक तुममें इंसानियत कितनी है..!! विरक्ति

वो आइने में कैसे बर्दास्त करती होगी खुद को, उसे तो धोखेबाज लोगो से सख्त नफरत थी..

किसी भी क्लास में नहीं पढ़ाया जाता है, कि कैसे बोलना चाहिए , लेकिन जिस प्रकार से आप बोलते हैं, वह तय कर देता है कि आप किस क्लास के हैं !

सिर्फ़ पोस्ट पढ़ने का ही रिश्ता न रखिए हमसे... कभी चाय+नाश्ते के लिये भी बुलाया करो हमें..!!

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