"कुछ लोग पाँवों से नहींदिमाग़ से चलते हैंये लोगजूते तलाशते हैंअपने दिमाग़ के नाप के।" नरेश सक्सेना

आज वो मेरे कफ़न का पूरा इंतज़ाम कर के आयी हैं, सुना है मेहंदी पर किसी और का नाम लिखा कर आयी हैं..!!

खुशियां हर तरफ हैं.... इंसान है की बस देखता एक तरफ है..!!

इन बारिशों से कह दो कहीं और जाकर बरसे ..... मुरशद ... इतनी रिमझिम तो रोज हमारी आँखों में होती है।।

तब और खिल उठेगा रंग उसकी मेहंदी का,जब मिश्रित उसमें मेरे प्रेम का रस होगा..!!

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