प्रेम..... रोग नहीं औषधि है..!!

बेवक़्त आया तूफ़ान बे-हिसाब तबाही मचा जाता है, फ़िर चाहे वो हमारे शहर में आया हो या हमारे जीवन में !

अल्फ़ाज़ नहीं रहे शेष अब, विचारधारा भी है शून्य, मस्तिष्क में है उथल-पुथल, आवेश भी लगता पुन्य..!! विरक्ति

आज का प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति, प्रेम का भूखा है..!!

दिल से उतर जाने वाले लोग सामने खड़े भी हों तो भी नज़र नहीं आते !

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