ख़्वाब ख़्वाब ही रह गया , जिंदगी ने कुछ यूं हिसाब किया..!!

जिंदगी के गणित मे इस तरह से पिछड़ा हूं, 2 लोगो से मिला हूं 200 लोगो से बिछड़ा हूं.

शुभचिंतक = शुभ होते ही चिंता करने लगा🤣

ऐसे माहौल में दवा क्या है , दुआ क्या है जहां कातिल खुद ही पूछे हुआ क्या है!

पतझड़ में सिर्फ़ पत्ते गिरते हैं, नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता.....

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