शुभचिंतक = शुभ होते ही चिंता करने लगा🤣

ऐसे माहौल में दवा क्या है , दुआ क्या है जहां कातिल खुद ही पूछे हुआ क्या है!

पतझड़ में सिर्फ़ पत्ते गिरते हैं, नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता.....

भरोसा टूटा है वहम की सफाई मत दो कहीं और जाकर मुंह मारो हमें सफाई मत दो

"तेरा हर नज़र-ए-अंदाज पसंद है मुझे" "बस एक नज़र अंदाज करना पसंद नहीं"

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