“मनुष्य दूसरों की दृष्टि में कभी पूर्ण नहीं हो सकता, पर उसे अपनी आँखों से तो नहीं ही गिरना चाहिए.! ” जयशंकर प्रसाद

अगर स्त्री के प्रेम में जिद्द न होती , तो मंदिर में कृष्ण के बाजू में राधा ना होती !!

ख़ुशी बिकती नहीं बाज़ार में देख तेरे ही भीतर तो छुपी है ज़रा सा हंस ज़रा सा मुस्कुरा देख ज़िंदगी कितनी हसीं है

पल कितने है नहीं जानती हु पर जितने है अच्छे है ये जानती हु बहुत से लोग मिले कुछ सबक सिखा के गए कुछ से सबक सीख लिए गए ।।

रिश्ता गहरा हो या न हो, विश्वास" गहरा होना चाहिए .

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