मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ, वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ। एक जंगल है तेरी आँखों में, मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ। दुष्यंत कुमार

सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जां कहते हैं, हम जो अपने मुल्क की मिट्टी को भी #माँ कहते हैं...

बरसात गिरी और कानों में इतना कह गई, गर्मी किसी की भी हो हमेशा नहीं रहती..

सुनो , ये इश्क़ , ये मोहब्बत , ये वफ़ा , अज़ी , सब वसीले है दिल दुखाने के...

!!कर्जदार रहेंगे हम उस हकीम के... जिसने दवा में उसका दीदार कर दिया...!!

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