बारिश है ,चाय है ,संग तेरी यादें भी बस तुम्हारी जगह किताबें आ बैठी हैं..! मनीषा शर्मा

टूटे ख़्वाब टूटी उम्मीदें अक्सर दर्द बड़ा देतीं हैं ज़ख्म नज़र नहीं आता मगर दिल चीर के रख देतीं हैं

आपसे बिछुड़े तो ख़ुद को और बेहतर कर लिया आँख दरिया कर न पाए दिल को पत्थर कर लिया नीलोफ़र नूर

अब शहर भर जाते हैं, और लाइफ खाली हो जाती है। अनघ शर्मा

“मनुष्य दूसरों की दृष्टि में कभी पूर्ण नहीं हो सकता, पर उसे अपनी आँखों से तो नहीं ही गिरना चाहिए.! ” जयशंकर प्रसाद

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