सोचा था हर मोड़ पर याद करेंगे तुम्हे लेकिन पूरा रस्ता ही सिदा था..

जबरदस्ती की नजदीकी से, सुकून की दूरियां अच्छी हैं....

शहर के पक्के मकानों में दरारें आ गईं गाँव के कच्चे घरों की नींव पक्की थी बहुत राघवेंद्र द्विवेदी

इश्क भी क्या अजीब बीमारी है , जिन्दगी है हमारी और तलब तुम्हारी है ..!!

जो दूसरों का हक़ और ख़ुशी छीन लेता है, उसके सुख की उम्र बहुत कम होती है।

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