शहर के पक्के मकानों में दरारें आ गईं गाँव के कच्चे घरों की नींव पक्की थी बहुत राघवेंद्र द्विवेदी

इश्क भी क्या अजीब बीमारी है , जिन्दगी है हमारी और तलब तुम्हारी है ..!!

जो दूसरों का हक़ और ख़ुशी छीन लेता है, उसके सुख की उम्र बहुत कम होती है।

मनुष्य कितना भी बड़ा क्यो न बन जाए, उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए। ईश्वरचन्द्र विद्यासागर

ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत...!!

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