सफलता डिग्री नहीं.... हुनर मांगती है...!!

पैसा इन्सान को ऊपर जरूर ले जाता हैं, परंतु इंसान पैसे को ऊपर नहीं ले जा सकता....

आंधी ने तोड़ दी है दरख्तों की टहनियां कैसे कटेगी रात परिंदे उदास हैं!

कुछ ख़याल कुछ हक़ीक़त मिलाते हैं हम, ऐसे ही पंक्तियों में ख़ुद को उतारते हैं हम।

मैं नहीं कहता मुझे औरों से बेहतर चाहिए मुझ को जितनी है ज़रूरत उतनी चादर चाहिए हैं परेशाँ इस लिए भी लोग अपनी प्यास से प्यास की ख़ातिर सभी को इक समुंदर चाहिए मुद्दतों भटके हैं मेरे ख़्वाब सारे दर-ब-दर...

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