रेशम का जाल है, देखने में सुंदर, किंतु कितना जटिल मुंशी प्रेमचंद

घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

बहुत ज़्यादा फ़र्क पड़ने के बाद.. फ़िर कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता..!!

हैसियत आसमान जैसी होनी चाहिए क्योंकि जमीन कितनी भी महंगी हो लोग खरीद लेते हैं !!

एक पुरूष की सुलझी हुई दृष्टि, एक स्त्री को सभी उलझनों से उबार देती है....

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