लोगो से कह दो हमारी तकदीर से जलना छोड़ दे हम घर से दवा नही ‘माँ की दुआ' लेकर निकलते है।

गौरव गान फिर से ऊंचा होगा । चाँद पर भी एक तिरंगा होगा ।

जरूरत जिन्हें दिमाग की हो, उन्हें दिल कभी मत देना.....

रेशम का जाल है, देखने में सुंदर, किंतु कितना जटिल मुंशी प्रेमचंद

घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

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