उन्हें याद करें! विक्रम साराभाई, नेहरू, अब्दुल कलाम

धन न हो तो रिश्ते... उंगली पे गिने जाते हैं....!!

बेड़ियां बंधी हैं जिस्म पर, परिंदें नोच खा रहे हैं, देख तेरे विरह में ये कैसे कैसे ख्वाब आ रहे हैं..!! विरक्ति

रात देर तक तेरी दहलीज पर बैठी रहीं आँखें, खुद न आना था तो कोई ख्वाब ही भेज दिया होता।

वक्त किसी का उधार नहीं रखता.. जो दोगे वो सूद समेत वापिस मिलेगा..!!

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