इबादत रब की और सूरत यार की हो, सजदा रब का और रसम प्यार की हो, आशिको के मजहब का क्या कहना, जिक्र रब का और बात यार की हो...

उन हसीन चेहरों पे लानत, जिनके दिल स्याह और सोच गलीच हो।

बांधकर "विरह" की बेड़ियों से मुझे "आईना" दिखाया था, मैं "गधा" हूं "इंसान" नहीं ये बात उसने मुझे सिखाया था..!! विरक्ति

सब कुछ होता है लोगों में , बस एहसास नहीं होता लोगों में...

हर बार के मिलने में तक़ल्लुफ कैसा , चाँद सौ बार भी निकले तो नया लगता है ।।

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