पहले मुग़ल दरबार में नाचते थे,अब मस्जिद के बाहर नाचते हैं,जगह और समय बदला है,मानसिकता व हरकत अभी भी वही है!
जीवन में कुछ छोड़ देने के बाद हीसब कुछ मिलता हैं..!!
प्रेम से विरह उत्पन होता है।विरह से दर्द होता है।दर्द से तड़प, तड़प से प्राथना होती है।प्राथना से भक्ति,भक्ति से ध्यान लगता है।ध्यान से परमात्मा,परमात्मा से संतुष्टि मिलती है।संतुष्टि से चैन और चैन से प्रेम मिलता है।
विधान को चुनना ज़ुबान को नहीं संविधान को चुनना अज्ञान को नहीं किसान को चुनना निशान को नहीं जवान को चुनना सुल्तान को नहीं ईमान को चुनना बेईमान को नहीं मुस्कुान को चुनना गुमान को नहीं मकान को चुनना मसान...