स्वतंत्र वही हो सकता है जो अपना काम अपने आप कर लेता है। विनोबा भावे

मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो

अंधेरे से नहीं अंधेरे में रखने वालों से बचिए !!!

घमंड तेरा भी एक ना एक दिन ख़ाक हो जाएगा, जिस दिन मिट्टी से बना ये शरीर राख हो जाएगा..!!

मोहब्बत में कैद हुई अपनी खुशियां तराशता रहा, चाभी रख कर कांधे पे मैं तिजोरी तलाशता रहा..!! विरक्ति

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