मुझ से झूठ की कोई उम्मीद न करे, मैं आईना हूं सुबह का अखबार नहीं।

खरीद के नफ़रत, मिलेगा क्या तुझे ? तू इश्क़ अपना लुटाए जा .. ना चाहत कर उसे पाने की, बस खुद को उस पर मिटाए जा ..

जब खोने को कुछ ना हो, तब पाने को बहुत कुछ होता है....

ओह अच्छा.... तो तुम कह रहे हो के बारिशों का भी मौसम होता है.... मतलब..... तुमने देखा नहीं कभी किसी की आंखों को बरसते...!! वैरागी

जब एक बार जला ली हथेलियां अपनी फिर खुदा ने भी उस हाथ में दिया ना दिया

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