यू ही सा था कोई जिसने मेरी जिंदगी मिटाई ना कोई खुदा ना कोई खुदाई

बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं कि उन के ख़त उन्हें लौटा रहे हैं किसी सूरत उन्हें नफ़रत हो हम से हम अपने ऐब ख़ुद गिनवा रहे हैं वो पागल मस्त है अपनी वफ़ा में मिरी आँखों में आँसू आ रहे हैं अजब कुछ रब्त है...

मुझ से झूठ की कोई उम्मीद न करे, मैं आईना हूं सुबह का अखबार नहीं।

खरीद के नफ़रत, मिलेगा क्या तुझे ? तू इश्क़ अपना लुटाए जा .. ना चाहत कर उसे पाने की, बस खुद को उस पर मिटाए जा ..

जब खोने को कुछ ना हो, तब पाने को बहुत कुछ होता है....

Translate »