आग का क्या हैं पल दो पल में लगती है बुझाते बुझाते एक जमाना लगता है

मै खुद में अल्प हूं.. पर मुझे विकल्प मत समझना..!!

आज के जीवन का सीधा सा परिचय है… आंसू वास्तविक और मुस्कान अभिनय है…!!

हर दिन होता "चीर" हरण है, तुम कितनी "द्रौपदी" बचाओगे, इन "कौरव" की औलादों पर, अब तुम कब "चक्र" चलाओगे..!! विरक्ति

दिलों के ताले की चाबी लफ्ज़ में नहीं लहजे में होती है !

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