दुरी हुई तो उनके करीब हम और हुए। ये कैसे फासले थे जो बढ़ने से कम हुए।

"पाई पाई, तेरे जुल्मों का हिसाब रखेंगे,हम सब याद रखेंगे!"

प्यार या नफ़रत सिर्फ़ बच्चे करते हैंबड़े होकर आदमी सिर्फ़ व्यापार करते हैं

चुनना होंगे नए लोग नई यात्रा के लिए देना होंगे पैर उन्हें चलने के वास्तेपर नहीं होगा आसान छीन पाना उनसे थाम रखी हैं जो रंगीन बैसाखियों

संस्कार ही ऐसे मिले है जनाब दिल से उतरे लोंगो से भी तमीज़ से बात करते है...

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