हारकर अपनी तक़दीर से,अवसादों के बीच भंवर में खोया था, जब मौत मांग रही थी ज़िन्दगी,मैं सिसक सिसककर रोया था.

लोग परखते है मुझे मेरी बातों से,काश कोई समझे मुझे मेरे जज्बातों से।

उस एक लम्हे को ढूंढो, जो तुमको ढूंढता है गुज़रते लम्हों से यूं बदगुमान क्या होना....!!!

सफलता यूँ ही क़दम नहीं चूमतीथके हों पाँव फिर भी चलना पड़ता है

मैं ढूंढता हूं खुद में ही खुद कोमैं शायद वो नहीं जो हुआ करता था !

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