जो परवाज करे हो कर्बला की दास्तां सुनकर वो घबराते नहीं जालिमों का लश्कर देखकर।

योजना के बिना लक्ष्य सिर्फ इच्छा है

राजा सोता रहें तो भी ठीक जनता आवाज भी उठाए तो गुनाह जलती रही बस्ती नग्न होती रही स्त्रियां जनता इसे कहें भी क़त्ल तो है सज़ा राजेश गौरी

आत्मसम्मान पर लगी चोट इंसान का वर्तमान और भविष्य दोनों बदल देती है

कौन सीखा है सिर्फ बातों से , सबको एक हादसा जरूरी है। जॉन एलिया

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