नहीं मैं बिना मतलब नहीं मुस्कराती...
मैं मुस्कुराती हूं उसे याद करते हुए...
कह न पाऊं तुझे
क्या खता होगी
दर्द सीने में कही
जिक्र शाम होगी .!!
#नजरो_की_नजाकत
अदावत खूब होगी
लौट आ हमसफर
तेरी रजा होगी ..!!
हिज्र आंखो से पूछ
आंखे खुमार होगी
तेरे पहलू में खो जाऊं
आंखे ए मदहोश होगी ..!!
मेरा रूठना
तेरा मनाना मुझे
मेरा कहना
तेरा सुनना मुझे
मेरा समझाना
तेरा समझना मुझे
मेरा बेपरवाह होना
और तेरा जिम्मेदार
कहना मुझे
हाए...वो भी क्या
खुश़-फैमियां थी मेरी ।।
कुछ बादलों की सी
है फितरत उनकी
छाते है मेरी छत पर
बरस कहीं और जाते है
बांट कर वक्त अपना
महफिल में गैरों की
बहानों भरे कुछ पल
हमको थमा देते है
रहूं हर पल उनके साथ
इस हसरत से वो
दिल में मेरी तस्वीर
बना कर रखते है
जानते...
संभल कर चल नादान, ये इंसानों की बस्ती हैं ...
ये रब को भी आजमा लेते हैं फिर तेरी क्या हस्ती हैं ...!!!