नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।

सज गई मंडी वोटो की आ गए उनके चाहतदार...हाथ जोड़कर मांग रहे हैंबन जाओ उनके खेवन हार...🙏🥸निर्णय लेना सोच समझकर नानी दादी दादा और पापा महिला बहने भी याद रखना तुम्हारी बचत पर फिर से ना पड़ जाए छापा....!!😜

होंगे दक्षिण, होंगे वामजनता को रोटी से काम

आशा चाहे जितनी भी कम हो,लेकिन निराशा से बेहतर होती है।

सारे सपेरे वीरानों में घूम रहे हैं बीन लिए,आबादी में रहने वाले साँप बड़े ज़हरीले थे

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