देश से बड़ा कुछ नही है,देश हित में मतदान जरूर करें...!

बिखरा वजूद…टूटे ख़्वाब…सुलगती तन्हाइयाँ….उफ़्फ़कितने हसीन…तोहफ़े दे जाती है,ये अधूरी मोहब्बत….

नए कपड़े बदल कर जाऊं कहां,और बाल बनाऊ किसके लिए..वो शख्स तो शहर ही छोड़ गया,मैं बाहर जाऊं किस के लिए...!!

दोबारा लौट कर शायद मेरा बचपन चला आएअगर पापा ख़्वाब में आ जाए तो नादान हो जाऊँ

कभी मुख़लिस तो कभी मुनाफ़िक़ हैं ये मतलब परस्त लोग माहौल के मुताबिक़ हैं !

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