उस की तस्वीर हटाये तो ज़माना गुज़राफिर भी दीवार से तस्वीर का साया न गया...

जो चले गए बड़े सकूं से होंगेजो जी रहे उनके दिल से पूछो ..!!

सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...

लम्बा धागा और लम्बी जुबान केवल समस्याए ही देते है,,इसलिए धागे को लपेटकर और जुबान को समेटकर रखना ही उचित है..."!!

रील बनाने से पहलेवोट देकर भविष्य बना लो

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