अजीब सी मोहब्बत मेरे हिस्से आयी है ,,,, ना दुवा है ना सलाम है पता नही महबूबा मेरी किस से लड़ कर आई है,,,,, यूँ तो सबसे करती है हंस हंस कर गल्ला बस मुझसे ही अकड़ कर मुह को फुलाई है

खुदकुशी करने की हो ठानी तो काफी है आंखो का पानी

वक़्त से लड़ने के लिए अपने आप का होना ज़रूरी है लोग बातें बनाएंगे दिलासा देंगे और हंसी भी उड़ाएंगे। नेहा यादव

पैर ज़मीं पर रखकर आसमां में उड़ना चाहती हैं ये बेटियाँ कुछ नहीं चाहती, बस जीना चाहती हैं।

झूठे इल्जामों की फ़िक्र कभी मत करना , क्योंकि वक्त का ग्रहण तो चाँद भी झेलता है ...

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