एक गुमनाम सा किरदार, हमारा भी हैं कहीं, जज्बात तो बहुत हैं, मगर हक एक भी नहीं, करना तो बहुत कुछ हैं किसी एक की खातिर, मगर मन इसी कश्मकश में हैं कि उनके जीवन में, हमारा कोई अस्तित्व भी तो नहीं कही ..

पिता के अलावा और कोई नहीं चाहता , कि आप उससे ज्यादा तरक्की करे ..!!

रब से कभी उम्मीद मत छोड़ना , और दुनिया से कभी उम्मीद मत करना

स्वर्ग के सम्राट को खबर कर दो, रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे हैं हम..

इंसान की ख्वाहिशों की कोई इंतेहा नहीं, दो जलेबी भी चाहिए चार समोसे के बाद

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