मैं जिंदगी से भागना नहीं, उससे जुड़ना चाहता हूं....

खरीद लूं खुशियां सारी ऐसी इच्छाएं पलती हैं, ना ख्वाब पूरे होते हैं ना ही तक़दीर बदलती है..!!

गिरगिट तो बेवजह बदनाम है, असली रंग तो अपने बदलते हैं...

उसके आने की उम्मीद ही नही तो उसकी आदत कैसी.. जब वो अपना ही नही तो शिकायत कैसी..

गुलामी के दावत से बेहतर हैं, आज़ादी की सुखी रोटी...

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