प्रेम से बढ़कर त्याग हैदौलत से बढ़कर मानवतापरन्तु सुंदर रिश्तों से बढ़करइस संसार मे कुछ भी नहीं !!

मन से जुड़कर तुझे तौलती हूं ,मैं हम से जुड़कर हमसे महकती हूं .. !!

हराम की कमाई से शक्लें तो तो सवार सकते हो,नस्लें नहीं !!

ये कलयुग है साहब यहाँ क़सम खाने वाले नहीं,दारू पीने वाले सच बोलते है !!

हृदय से जो दिया जा सकता है वो हाथ से नहीं और मौन से जो कहा जा सकता है वो शब्द से नहीं.!!

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