ज़िन्दगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए

मेरी तलब के तकाज़े पे थोड़ा गौर तो करमैं तेरे पास आया हूं खुदा के होते हुए

मेरे मसले अलग है दुनियां से मैं सबसे ज्यादा अपने में ही उलझी हूं

शक अपने ही हुनर पर भी करते हैइस तरह से बहुत कुछ हम सिखते है

अन्याय को पता है उसे#न्याय परास्त करेगाजीत न्याय की ही होगी

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