ता उम्र के लिएं हाथ थामना होता है,ए पल दो पल का खेल नहीं होता...

खुद मे झाकने के लिए ज़िगरा चाहिए,,,दुसरो की शीनाखत् मे हर शख्स माहिर है,,,

अपनी ज़िंदगी में खुद रोशनियां पैदा करो,यकीनजानो तुम्हारे अलावा तुम्हारा कोई भी वफादार नही है ...

रूठी हुई ख़ामोशी से बोलती हुई शिकायतें अच्छी होती हैं

जिसकी मति और गति सत्य की हो,उसका रथ आज भी श्री कृष्ण चलाते हैं

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