रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली ना प्रीत। काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँति विपरीत॥

अपनी ज़िन्दगी को मैं दीमक कि तरह बर्बाद कर दूंगा, ज़िन्दालाश बनकर रहूंगा मैं, रूह को आजाद कर दूंगा..!!

एक पृष्ठ है भूमिका, एक पृष्ठ निष्कर्ष बाकी पन्नों पर जीवन का लिखा हुआ सतत संघर्ष !

ना छेड़ क़िस्सा -ऐ- उल्फ़त का , बड़ी लंबी कहानी है , मैं ग़ैरों से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है !

मैं रोज सुबह कभी देर रात आता हूं तुम्हारे शब्द पंखों के कोमल भावों को कभी ओढ़ता कभी बिछाता हूं

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