सारी उम्र एक ही गलती हमने बार बार दोहराई
अन्धों को आँसू दिखलाये बहरों को आवाज़ लगाई
बूँद पानी को मेरा शहर तरस जाता है
और बादल है कि दरिया पे बरस जाता है
गुलशन के निगहबानो हम को न भुला देना
कुछ ख़ार भी लाज़िम हैं फूलों की कहानी में
ऐ दीदा-ए-तर तुझ को मालूम नहीं शायद
बह जाते हैं ख़्वाब अक्सर अश्कों की रवानी में
ये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है फूलों की ज़बानी है
ईश्वर का मौन, सुन पाना और
उन, इशारों पर चलते जाना ।
ले जाएगा यही, कामरानी तक
तेरा जज़्बा तेरा यूं साहस भर चलते जाना।