थोड़े बहुत संस्कार अब गांव में ही बचे हैं, शहरों में लोग अंग प्रदर्शन को फैशन समझते हैं...

खूबियां जान कर चाहना आकर्षण है, कमियां जान कर चाहना प्रेम है....

बस सफ़र के मज़े लो, मंजिल सबकी मौत है.....

मेरी हैसियत से ज्यादा मेरी थाली में तूने परोसा है तू लाख मुश्किलें दे दे मालिक, मुझे तुझ पर भरोसा है !

हर पेड़ धरा का गहना है, ऐसा ही सबका कहना है।। पेड़ों से चलता है जीवन, ये हैं असली धरती का धन।। मत काट इन्हें रोना होगा, जल की बूँदे खोना होगा।। खुद से खुद का ही रण होगा, रण भी इतना भीषण होगा।। #आक्सीजन ही जीवन...

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