ये मतलबी दुनिया है साहेब चाय बनाने के बाद चाय पत्ती छानकर फेक दी जाती है

प्रेम में रस्म होती है रूठने की , तुम्हें क्यों लगा हमारा झगड़ा हुआ है ।।

थोड़े बहुत संस्कार अब गांव में ही बचे हैं, शहरों में लोग अंग प्रदर्शन को फैशन समझते हैं...

खूबियां जान कर चाहना आकर्षण है, कमियां जान कर चाहना प्रेम है....

बस सफ़र के मज़े लो, मंजिल सबकी मौत है.....

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