दिल की बात है असर तो करेगी न, मेरा लिखा तुम कभी तो पढोगे न...!!

अंजाम की ख़बर तो मीरा को भी थी बात सिर्फ़ मोहब्बत निभाने की थी..!

मुजरिम हो गया इस कद्र खुद की नजरो में स्वाभिमान छोड़ प्रेम ढूंढ रहा था पत्थरों में

ये मतलबी दुनिया है साहेब चाय बनाने के बाद चाय पत्ती छानकर फेक दी जाती है

प्रेम में रस्म होती है रूठने की , तुम्हें क्यों लगा हमारा झगड़ा हुआ है ।।

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