बाप मेरा राजा नहीं था लेकिन , पाला मुझे राजकुमार की तरह था ।।

हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी कुछ हमारी ख़बर नहीं आती

सदा दिवाली सन्त की ,बारह मास बसंत। प्रेम रंग जिन पर चडे ,उनके रंग अनंत ।।

रखने की बस ये तीन ही चीज़ें हैं इन दिनों, हिम्मत रखो यक़ीन रखो और फ़ासला रखो।

इंतज़ार मत करो जो कहना हो कह डालो क्योंकि हो सकता है फिर कहने का कोई अर्थ न रह जाए।

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