जिस पर आकर हो जाते हैं कत्ल मेरे लफ्ज़ ,, उसकी खुशी मैं हम अपनी ग़म भूल बैठें..!!

कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आए और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी

बाप मेरा राजा नहीं था लेकिन , पाला मुझे राजकुमार की तरह था ।।

हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी कुछ हमारी ख़बर नहीं आती

सदा दिवाली सन्त की ,बारह मास बसंत। प्रेम रंग जिन पर चडे ,उनके रंग अनंत ।।

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