हैरत है की हम जैसे लोग भी ठुकराए हुए है जबकि हम जैसे लोग तो सीने से लगाने के लिए है...

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय

सब गुज़र तो जाता है, मगर सब भुलाया नहीं जाता...

शिकवे इतने हैं किताबे लिख दूं, सब्र इतना है कि एक लफ्ज़ भी ना कहूं...

जिनके पास मुलाकात का कोई रास्ता नहीं वे आँख बंद करके एहसास कर लिया करते हैं...

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