वादों की जरूरत नहीं होती उन रिश्तो में,,
जहां पर भरोसा अपने आप से ज्यादा होता है।।
यह कविता नहीं
जीवन का सार है
जिसने ख़ुद को ना चाहा
उसका जीना बेकार है
सौ सितारों के जहां भी
उसके लिए अंधकार है
जो ख़ुद को ना चाहे
खुद को
सजा दे
जो खुद को ना चाहे
किसी को क्या
ख़ुशी दे
जो खुद को खुशी दे
मोहब्बतें जगा दे
जो खुद...
दो चार मिस यूनिवर्स तो उस पर यूँ ही कुर्बान कर दूँ,
आपने देखी कहा है साड़ी मे तस्वीरें मेरी जान की ..
महंगाई जैसा इश्क़ है मेरा,
कमबख्त बढ़ता ही जा रहा है।
कुछ इस तरह लगना तुम गले मुझ से,
कि छीन लेना मन की उदासियां सारी .!