मेरे जीवन से मिला एक तजुर्बा,
आज भी बहुत अहम् था,
प्यार, भरोसा, वफ़ा, ज़फा,
इंसान के लिये सिर्फ वहम् था..!!
कुछ सामान हुआ इधर उधर
फिर से सम्भाल कर रख दिया
पर नुक़सान ना हुआ
हालाँकि तूफ़ान तेज था
और मैं जानती थी
कि वो ज़िद्दी है ……
तूफ़ान तेज था
अचानक से आया
हवायें मज़बूत थी
तोड़ना मुश्किल था
मुझे अंदाज़ा था कि
आए बिना मानेगा नहीं
रास्ते बंद करती तो
तोड़फोड़ करता
फिर दो दरवाज़ों को खोल दिया
एक आने का
एक जाने का
और थोड़ा...
मैं टूट कर रोने वालों में से नहीं हूंँ,,
जो मुझसे खफा हो वो शौक से दफा हो..!!
अगर मैं सबके जैसा होता,
तो यकीन करो इतना परेशान ना होता...